• छायावाद के आधार स्तंभों में से एक।

  •  छायावादी, प्रगतिवादी एवं अरविंद दर्शन से प्रभावित मानवतावादी काव्य-सृजन।

  •  आचार्य नंददुलारे वाजपेयी ने इन्हें ‘छायावाद का प्रवर्तक’ कहा।

  •  आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इन्हें ‘छायावाद का प्रतिनिधि कवि’ कहा।

  •  छायावाद के विष्णु के रूप में प्रसिद्ध।

  •  ‘प्रकृति के सुकुमार कवि’ के रूप में प्रसिद्ध।

  •  प्रथम छायावादी काव्य-कृति उच्छ्वास, 1922 |

  •  ‘पल्लव (1926) कविता-संग्रह की भूमिका ‘छायावाद का’ ‘मेनीफेस्टो’ (घोषणा-पत्र) कहलाई।

  •  युगांत, 1936 ई. छायावाद की अंतिम तथा प्रगतिवाद की प्रथम रचना।

  •  1938 से ‘रूपाभ’ नामक प्रगतिशील मासिक पत्रिका का सम्पादन।

  •  1950-1957 के मध्य आकाशवाणी में परामर्शदाता के रूप में कार्यरत।

  •  सात वर्ष की उम्र से कविता-लेखन।

  •  अठारह वर्ष की उम्र में कवि के रूप में पहचान।

  •  1907 से 1918 के मध्य के काल को स्वयं कवि ने अपने कवि-जीवन का प्रथम चरण माना। ये कविताएँ ‘वीणा’ में संकलित।

  •  कवि ने स्वयं अपनी काव्य-कृति ‘वीणा’ को ‘तुतली बोली में एक बालिका का उपहार’ कहा।

  •  कुल 28 पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें कविता, पद्य-नाटक एवं निबंध शामिल।

  • काव्य-कृतियाँ

  •  छायावादी कृतियाँ: उच्छ्वास, वीणा, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन।
     प्रगतिवादी कृतियाँ: युगान्त, युगवाणी, ग्राम्या।
     अरविंद दर्शन से प्रभावित कृतियाँ: स्वर्णकिरण, स्वर्णधूलि, युगांतर, युगपथ।
     मानवतावादी कृतियाँ: लोकायतन, चिदम्बरा, पतझर, रजत शिखर, पौ फटने से पहले, कला और बूढ़ा चाँद, अतिमा।
    अन्य कृतियाँ
     तारापथ: प्रतिनिधि कविताओं का संकलन।
     ज्योत्स्ना: रूपक।
     मधुज्वाल: उमरखय्याम की रूबाइयों का हिंदी अनुवाद।
     खादी के फूल: बच्चन के साथ संयुक्त कविता-संग्रह।
     लोकायतन: गाँधीवाद से प्रभावित महाकाव्य।

  • पुरस्कार एवं सम्मान
    – कला और बूढ़ा चाँद कृति पर साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1960 |
    – पद्मभूषण, 1961
    — चिदम्बरा कृति पर ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1968 |
    – हिंदी साहित्य में प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्तकर्ता।
    – सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार।

  • प्रथम रश्मि : सुमित्रानंदन पंत
    – 1919 में रचित कविता।
    – 1927 में पंत के ‘वीणा’ काव्य-संग्रह में संकलित।
    – सूर्य की पहली किरण के पृथ्वी पर आते ही प्रकृति एवं -परिवेश में होने वाले परिवर्तन का मनोहारी चित्रण।
    –  प्रस्तुत कविता में कवि ने ‘प्रथम रश्मि’ (चिड़िया) से – – – -काल्पनिक संवादों के माध्यम से भावाअभिव्यक्ति की है।

  • 1. ‘पंत जी की रचनाओं ‘वीणा’ और ‘पल्लव’ दोनों में अंग्रेजी कविताओं से लिए हुए भाव और अंग्रेजी भाषा के लाक्षणिक प्रयोग बहुत मिलते हैं’ यह कथन किसका है? (UP PGT-2021)
     उत्तर: रामचंद्र शुक्ल

  • 2. “सुंदरता का आलोकस्रोत है फूट पड़ा मेरे मन में। जिससे नवजीवन का प्रभात होगा फिर जग के आँगन में।।” उपर्युक्त पंक्तियों के रचयिता हैं– (UGC NET-2020, 2021)
     उत्तर: सुमित्रानंदन पंत

  • 3. ‘हाय! रुक गया यहीं संसार बना सिंदूर अनल अँगार! वातहत लतिका वह सुकुमार पड़ी छिन्नाधार!! इस काव्यांश का प्रतिपाद्य है – (UGC NET-2020, 2021)
     उत्तर: पुरुष के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है।

  • 3. सुमित्रानंदन पंत ने अपने किस काव्य-संग्रह को ‘बाल कल्पना का दुधमुँहा प्रयास’ कहा है? (UPHESC Asst. Prof.-2021)
     उत्तर: वीणा

  • 4. ‘प्रकृति का सुकुमार राजकुमार’ किसे कहा जाता है? (Haryana Asst. Prof.-2017, NVS PGT-2014, UP TGT-2016)
     उत्तर: पंत

  • 5. ‘लोकायतन’ पंत की प्रबंध कृति है जो किन दो खंडों में विभाजित है? (GDC Asst. Prof.-2017)
     उत्तर: बाह्य परिवेश और अंतश्चैतन्य

  • 6. ‘कविता हमारे परिपूर्ण क्षणों की वाणी है’ यह किसने कहा है? (Haryana Asst. Prof.-2017)
     उत्तर: सुमित्रानंदन पंत

  • 7. “वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान” के रचनाकार कौन हैं? (DSSSB PGT-2018)
     उत्तर: सुमित्रानंदन पंत

  • 8. “छोड़ द्रुमों की मृदु छाया तोड़ प्रकृति से भी माया बाले! तेरे बाल-जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन?” उपर्युक्त चर्चित पंक्तियों के रचनाकार हैं– (DSSSB TGT-2018, KVS PGT-2017)
     उत्तर: सुमित्रानंदन पंत

  • 9. कवि ने ‘प्रथम रश्मि’ कविता में ‘रंगिणि’, ‘बाल विहंगिनी’, ‘तरुवासिनी’, ‘अंतर्यामिनी’, ‘बहुदर्शिनी’, ‘नभचारिणी’, विशेषण किसके लिए प्रयुक्त किये हैं?
     उत्तर: चिड़िया

  • 10. रंगिणि के द्वार पर कौन प्रहरी की तरह घूम रहे थे?
     उत्तर: जुगनू

  • 11. ‘प्रथम रश्मि’ कविता में कवि ने ‘कोक शोक से दीवाना’ किसे कहा है?
     उत्तर: चकवा को

  • 12. ‘निराकार तम मानो सहसा,ज्योति पुंज में हो साकार, बदल गया द्रुत जगत जाल में,धर कर नाम रूप नाना’ पंक्तियों के विषय में असंगत कथन है –
     उत्तर: इन पंक्तियों में रात्रि के बाद उजाला होने पर प्रकृति में होने वाले परिवर्तन का सूक्ष्म चित्रण किया है।

  • 13.सुमित्रानंदन पंत का बचपन का नाम क्या था?
     उत्तर: गोसाईं दत्त

  • 14.सुमित्रानंदन पंत के द्वारा सम्पादित मासिक पत्रिका है –
     उत्तर: रूपाभ

  • 15. पंत को निम्नलिखित में से किस कृति पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ?
     उत्तर: कला और बूढ़ा चाँद

  • 16. पंत जी की प्रतिनिधि कविताओं का संकलन किस नाम से प्रकाशित हुआ?
     उत्तर: तारापथ

  • 17. “छोड़ द्रुमों की मृदु छाया तोड़ प्रकृति से भी माया बाले! तेरे बाल-जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन?” उपर्युक्त चर्चित पंक्तियों के रचनाकार हैं– (DSSSB TGT-2018, KVS PGT-2017)
     उत्तर: सुमित्रानंदन पंत

18. पंत के द्वारा रचित रूपक है –

 उत्तर: ज्योत्स्ना

19. कवि पंत ने उमर खय्याम की रुबाइयों का हिंदी अनुवाद किस नाम से किया?

 उत्तर: मधुज्वाल

20. पंत जी का बच्चन जी के साथ संयुक्त रूप से प्रकाशित कविता–संग्रह है –

 उत्तर: खादी के फूल

21. ‘ पातों पर चुपचाप ओस के आँसू कौन डालता है?

 उत्तर: नीलाकाश

22. कवि पंत ने परिवर्तन से मृत्यु का क्या संबंध माना है?

 उत्तर: मृत्यु परिवर्तन का गरल-दंत है।

23. कवि ने ‘परिवर्तन का कंचुक’ किसे कहा है?

 उत्तर: कल्पांतर को

24. कवि ने निम्न में से किसे परिवर्तन के सैन्य-दल में शामिल नहीं किया है?

 उत्तर: वज्रपात

25.परिवर्तन’ कविता में कवि ने लालची गीध किसे कहा है?

 उत्तर: रोग-शोक