अनुवाद के अर्थ एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
– अनुवाद मानव सभ्यता के साथ ही विकसित एक ऐसी तकनीक है जिसका आविष्कार मनुष्य ने बहुभाषिक स्थिति की विडम्बनाओं से बचने के लिए किया था। विश्व के विभिन्न प्रदेशों की जनता के बीच अन्तः सम्प्रेषण की प्रक्रिया के रूप में अनुवाद को दार्शनिक एवं जीववैज्ञानिक भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है।
अनुवाद शब्द की व्युत्पत्ति
अनुवाद एक यौगिक शब्द है। वद् धातु में ‘घञ्‘ प्रत्यय लगाने से वाद शब्द बनता है। वद् धातु का अर्थ है बोलना या कहना। ‘वाद‘ शब्द में ‘अनु’ उपसर्ग के जुड़ने से अनुवाद शब्द बनता है। इस प्रकार अनुवाद का मूल अर्थ है ‘पुनः कथन‘ या ‘किसी के कहने के बाद कहना’।
अंग्रेज़ी में अनुवाद के लिए ‘ट्रांसलेशन‘ शब्द का प्रयोग होता है जो लेटिन के ट्रांस और लेशन शब्दों के संयोग से बना है। जिसका अर्थ है ‘पार ले जाना’। (ट्रांस – पार, लेशन – ले जाना)।
उर्दू के अनुवाद के लिए ‘तर्जुमा‘ शब्द प्रचलित है। ट्रांसलेशन में मूल भाषा के अर्थ को अन्य भाषा (लक्ष्य भाषा) में रूपांतरित करने की प्रक्रिया पर बल दिया जाता है।
परिभाषाएं
नाइडा – “स्रोत भाषा में कही गई बात को लक्ष्य भाषा में सहज एवं निकटतम समानार्थी शब्दों द्वारा व्यक्त करना अनुवाद है और यह समानता अर्थ और शैली दोनों की होनी चाहिए यद्यपि प्रथम स्थान अर्थ का है।”
ऑक्सफोर्ड इंगलिश डिक्शनरी – “अनुवाद वह क्रिया एवं प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में रूपांतरित किया जाता है।”
भोलानाथ तिवारी – “भाषा ध्वन्यात्मक प्रतीकों की व्यवस्था है और अनुवाद इन्हीं प्रतीकों का प्रतिस्थापन है।”
सैमुएल जॉनसन – “मूल भाषा की सामग्री के भावों की रक्षा करते हुए उसे दूसरी भाषा में बदल देना अनुवाद है।”
उपर्युक्त परिभाषाओं के विश्लेषण से अनुवाद की बहुपक्षीयता पर प्रकाश पड़ता है। अनुवाद का मूल लक्ष्य है स्रोतभाषा की सामग्री को लक्ष्यभाषा में यथासंभव अपने मूल रूप में लाना।
अनुवाद का महत्व –
हर देश और काल में, दूसरे देश और काल की भावनाओं और विचारधाराओं की अभिव्यक्ति के माध्यम में अंतर रहा है। यह अन्तर तत्संबंधी देश और तत्कालीन मानव-समाज की भाषा और बोली के अन्तर के कारण ही रहा है। दूर-दराज फैली मानव जाति ने अपनी भावनाओं को प्रकट करने अथवा विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए एक विशिष्ट भाषा या बोली का अन्वेषण और विकास किया। विश्व के विभिन्न प्रदेशों की जनता के बीच अन्तः सम्प्रेषण की प्रक्रिया के रूप में अनुवाद की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है। अनुवाद मानव सभ्यता के साथ ही विकसित एक ऐसी तकनीक है जिसका आविष्कार मनुष्य ने बहुभाषिक स्थिति की विडम्बनाओं से बचने के लिए किया था।
संस्कृति के व्यतिरेक के कारण भाषाओं की संरचना एवं अभिव्यक्ति भिन्न-भिन्न हो जाती है। ऐसी स्थिति में कार्य करना अनुवाद एक सुदृढ़ सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है। यह एक ऐसा सेतु है जिसके माध्यम से समय तथा दूरी के अंतराल को पार किया जा सकता है।
विश्वसंस्कृति एवं विश्वमैत्री के विकास में सहायक –
विश्वसंस्कृति के विकास में अनुवाद का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। धर्म एवं दर्शन, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक, वाणिज्य एवं व्यवसाय, राजनीति एवं कूटनीति जैसे विभिन्न क्षेत्रों का अनुवाद से गहरा सम्बन्ध है। संस्कृति की प्रगति वस्तुतः अनुवाद रूपी धुरी पर आश्रित है। वस्तुतः प्राचीन काल की संस्कृतियों के विकास में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सीरिया एवं बेबिलोन को संस्कृति बहुभाषी लोगों की संस्कृति थी और उनमें प्रशासनिक कार्य-कलापों आदि में अनुवाद का महत्वपूर्ण हाथ था। रोम के लोगों ने यवन संस्कृति को अनुवाद के माध्यम से अपनाया था। अरबों ने तो भारत के गणितशास्त्र, खगोलविज्ञान एवं आयुर्वेद के ग्रंथों का अनुवाद करके अपने विकास की भूमिका तैयार की थी। बाइबिल तथा पाश्चात्य साहित्य का भारतीय भाषाओं में और भारतीय आध्यात्मिक ग्रंथों एवं भारतीय साहित्य का यूरोपीय भाषाओं में जो अनुवाद हुआ उसने विश्वसंस्कृति में महान परिवर्तन उपस्थित किया। विश्वमैत्री एवं सहयोग के इस दौर में किसी भी प्रदेश के लोगों को समझने के लिए उस प्रदेश के साहित्य को समझना अत्यन्त आवश्यक है और अनुवाद इसमें विशिष्ट भूमिका निभाता है।
विकासशील देश के लिए महत्वपूर्ण
भारत जैसे विकासशील एवं बहुभाषा-भाषी राष्ट्र में प्रशासन, कानून, शिक्षा, व्यवसाय, विज्ञान एवं कृषि के क्षेत्र में अनुवाद की महती भूमिका है। वैज्ञानिक सूचनाओं के आदान-प्रदान में, पत्रकारिता और समाचार सम्प्रेषण में, राजनीतिक एवं कूटनीति व्यवहार में अनुवाद की अनिवार्यता स्वयं सिद्ध है। भारत जैसे बहुभाषा-भाषी राष्ट्र में परस्पर अनुवाद की तो आवश्यकता है ही, विश्वभाषाओं से भी अनुवाद की आवश्यकता है।
नवीन भाषाओं एवं ज्ञान की जानकारी का साहित्य
सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति एवं संचार साधनों के प्रसार ने विश्व को एक गाँव में बदल दिया है। अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्राज्यीय तथा अंतर्भाषायी सम्बन्ध आज इतने सामान्य तथा सहज हो गए हैं कि एक व्यक्ति को अन्य भाषा-भाषी के मौखिक अथवा लिखित विचारों को जानना तथा विश्व की अनेक भाषाओं में संचित ज्ञानराशि को समझना अनिवार्यता बन गई है। नए शोधों एवं ज्ञान का विपुल भंडार आज किसी एक देश तक सीमित नहीं रह गया है। अनुवाद के माध्यम से यह विश्व के कोने-कोने में पहुँच रहा है। अतः अनुवाद की महत्ता स्वयं सिद्ध है।
शिक्षा के क्षेत्र में महत्व
शिक्षा के क्षेत्र में अनुवाद के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। विश्व स्तर पर उपलब्ध ज्ञान को अनुवाद के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। यदि देश को वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में विश्व के अन्य देशों के साथ निकटतम संपर्क रखने की आवश्यकता पड़ेगी और उनकी भाषाओं में अभिव्यक्त ज्ञान को अपने देश की भाषाओं में अनुदित करने की आवश्यकता होगी।
प्रशासनिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत जैसे देश के लिए अनुवाद का महत्व सर्वाधिक है। आज राष्ट्रीय स्तर पर कामकाज के लिए राजभाषा हिन्दी है किंतु अंग्रेज़ी भी सहयोगी भाषा के रूप में चल रही है। अतः अनुवाद का महत्व और भी बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त गृहमंत्रालय के दिशा निर्देशों के अनुसार प्रशासनिक कार्य, मुद्रण, लेखन, साइनबोर्ड जैसी मदें द्विभाषिक होने के कारण अनुवाद का महत्व बढ़ गया है। आज प्रशासनिक व्यवस्था में अनुवाद का महत्व बढ़ता जा रहा है।
व्यापार-वाणिज्य के लिए महत्व
वाणिज्य और उद्योग जग पर दृष्टिपात करें तो हम पाएँगे कि यहाँ भी अनुवाद महत्वपूर्ण है। व्यापारियों को यदि अपना उत्पाद अखिल भारतीय या विश्व स्तर पर पहुँचाना है तो उसे अनुवाद का सहारा लेना होगा। अतः इस क्षेत्र में भी अनुवाद का महत्व निर्विवाद है।
संचार-माध्यमों के लिए महत्व
संचार माध्यमों की प्राणवायु है अनुवाद। आज-चाहे प्रिंट मीडिया हो (अखबार, पत्रिकाएँ आदि) चाहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (दूरदर्शन, रेडियो, उपग्रह, कम्प्यूटर आदि) अनुवाद आदि के बिना चल ही नहीं सकता। आज समाचार प्रेषण एजेंसियाँ अपने समाचार अंग्रेज़ी या हिंदी में भेजती हैं, परन्तु क्षेत्रीय समाचार पत्र तत्काल उसका अनुवाद करते हैं। अनुवाद के ही कारण हम विश्व की किसी भी फिल्म, नाटक, डाक्यूमेंट्री, समाचार, घटना आदि का आनन्द उठा सकते हैं। आज मीडिया अनुवाद के माध्यम से विश्व के किसी भी कोने में घटने वाली घटना को पाठक और श्रोता के समक्ष उपस्थित कर देता है। अतः इस क्षेत्र में भी अनुवाद का महत्व सर्वोपरि है।
निष्कर्ष
इस प्रकार हम देखते हैं कि भाषा एवं साहित्य की समृद्धि में, विश्वसंस्कृति में, विज्ञान एवं तकनीक के प्रसार में, शिक्षा के क्षेत्र आदि में अनुवाद की महत्ता निर्विवाद है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है। ज्ञान का प्रसार करता है। संस्कृति का संवाहक है तथा राष्ट्रों के बीच आपसी समझ और सद्भाव में वृद्धि करता है। गेटे के शब्दों में— “अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असंभव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्वपूर्ण है।”
