रेखा की चारित्रिक विशेषताओं का विश्लेषण करें।

Character sketch of Rekha from Nadi Ke Dweep

भूमिका

हिन्दी के प्रयोगवाद के प्रवर्तक के रूप में सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, विश्वसनीय कवि हैं। हिंदी साहित्य में इनकी प्रतिष्ठा एक बहुमुखी प्रतिभासंपन्न कवि, संपादक, ललित-निबंधकार और उपन्यासकार के रूप में है।

अज्ञेय ने अपने संपादन में निकलने ‘तार सप्तक’ (1943) और ‘दूसरा सप्तक’ (1951) की प्रयोगवादी काव्य प्रवृत्तियों को देखते हुए उसे एक नई धारा के रूप में चिह्नित किया गया। अज्ञेय को नई कविता धारा का भी पथ-प्रदर्शक माना जाता है। तीसरा सप्तक (1959)

प्रमुख उपन्यास :-

  • शेखर एक जीवनी (2 भाग क्रमशः 1941, 1944)
  • नदी के द्वीप (1951)
  • अपने अपने अजनबी (1961)
  • कृष्णदत्त पालीवाल के संपादन में ‘अज्ञेय रचनावली’ के 18 खंडों में उनकी सभी रचनाओं को संकलित करने का प्रयास किया गया है।
  • अज्ञेय को ‘आँगन के पार द्वार’ के लिए वर्ष 1964 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और ‘कितनी नावों में कितनी बार’ के लिए वर्ष 1978 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उपन्यास

उपन्यास शब्द संस्कृत के ‘उप’ (निकट) और ‘न्यास’ (रखना या स्थापित करना) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – विस्तारपूर्वक कही गई कथा।

  • हिन्दी में उपन्यास का आरंभ भारतेन्दु हरिश्चंद्र के समय से माना जाता है।
  • लाला श्रीनिवास दास का ‘परीक्षा गुरू’ (1882) हिंदी का पहला उपन्यास माना जाता है।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार – “उपन्यास वह गद्य रचना है जिसमें जीवन की विस्तृत झाँकी मिलती है और जिसके पात्र जीवंत प्रतीत होते हैं।”
  • प्रेमचंद के अनुसार – “उपन्यास जीवन का दस्तावेज है – वह समाज का दर्पण है जिसमें यथार्थता की झलक मिलती है।”

नदी के द्वीप :- ‘नदी के द्वीप’ अज्ञेय का एक अत्यंत प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यास है। इसमें मानव जीवन की गहराइयों, आत्म-संघर्ष, स्वतंत्रता और प्रेम की जटिलता को चित्रण किया गया है। ‘नदी’, ‘परम्परा’, ‘संस्कृति’, ‘समाज’ का प्रतीक है और ‘द्वीप’ व्यक्तित्त्व का प्रतीक है। उपन्यास के 4 मुख्य पात्र हैं :- चंद्रमाधव, भुवन, रेखा, गौरा। उपन्यास इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति, समाज रूपी नदी का हिस्सा है, फिर भी उसकी अपनी एक अलग पहचान (द्वीप) होती है।

रेखा की चारित्रिक विशेषताएँ :-

‘नदी के द्वीप’ का कथानक चरित्र लेकर उसके चारों ओर घूमता है। नायिका रेखा के व्यक्तित्त्व को केंद्र में विवाहिता है। विवाह के 2 वर्ष बाद ही पति-पत्नी की आयु 27 के लगभग होगी, वह भावुक, साहसी, एकांतप्रिय, विचारशील, शिष्ट एवं असाधारण व्यक्तित्त्व की महिला है। भुवन जहाँ एक ओर जीवन की नदी पर से सेतु बाँधने की कल्पना को बड़ी मूर्खता समझता है, वहीं रेखा उसे भूख और क्रियाशीलता का साधन मानती है। उसकी मनोवैज्ञानिक, शारीरिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं।

नामकरण की सार्थकता :- ‘

नदी के द्वीप’ की रेखा मुख्य नायिका है। रेखा गतिशील होती है, वह किसी भी बंधन में बंध नहीं सकती। वह अपना नया अस्तित्व बनाती है। वह अपना नामकरण सार्थक करती है। अज्ञेय ने रेखा को प्रतीक अर्थ में प्रस्तुत किया है।

2. त्याग की प्रतिमूर्ति :- भुवन व रेखा दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं। परंतु जब रेखा को पता लगता है कि गौरा भी भुवन से प्रेम करती है वह भुवन व अपना बच्चा गिरा देती है। गौरा को अपनी उँगली की हरी चूड़ियाँ भेंट करती है। रेखा का प्रेम उदात्त है। वह एक त्याग की प्रतिमूर्ति के रूप में हमारे सम्मुख प्रस्तुत होती है।

3. समर्पणशील :- रेखा की शादी डॉ रमेश चन्द्र से हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद भी वह भुवन के प्रेम-मोह से मुक्त नहीं हो पाई। वह आजीवन के लिए भुवन के प्रति समर्पित अपने आप को महसूस करती है। वह भुवन को हमेशा खुश देखना चाहती है।
क्योंकि वह भुवन को प्यार करती है, उसे कुछ देना चाहती है? कुछ नहीं, सब कुछ, अपना आप।

4. संघर्ष की भावना :- रेखा ने अपने जीवन में हमेशा संघर्ष ही किया है। वह नौकरी करती है। विवाहित होने पर भी पति के पास नहीं रहती, अकेली होने के कारण पति से तलाक होना पर भी भुवन से प्रेम, उस से बिछुड़ना, बच्चा गिराना, पति से तलाक इस प्रकार का जीवन रेखा अपनी दिखाई देती है।

5. आत्मपीड़न की अभिव्यक्ति :- हेमेन्द्र से बिछुड़ने बाद रेखा भुवन से मिलती है के हवाले करती है। आत्मपीड़न से रेखा कुलियन झील में अपने आपको भुवन की स्मृति रखती है। वह निश्चित से आशूभित रेखा दिल्ली में भी डुलियन वह घूमने जाएगी जमना की रेती में जहाँ बैठकर भुवन ने उसका बालू का घर बनाया था।

6. वर्तमान का विश्वास :- रेखा भविष्य के प्रति उदासीन दिखाई देती है। वह वर्तमान को ही मानना व जीना चाहती है।
रेखा के अनुसार –भविष्य में अब मैं नहीं मानतीयह भी नहीं जानती तुम्हारे जीवन में आई हूँ कि नहीं? मैंने बारबार कहा है कि भविष्य नहीं हूँ, केवल वर्तमान का प्रस्फुटन हूँ….”

7. आत्मपीड़न :- रेखा में आत्मपीड़न का गुण है। स्वयं को दुखी करके सुख का अनुभव करने वाली वह पात्र है। रेखा भुवन से प्यार करती है, लेकिन जब उसे भुवन और गौरा के प्यार के बारे में पता चलता है, तब वह अपना दुःख समेटे हुए उन दोनों के लिए तैयार करती है।
भुवन, मैं तुम्हारे जीवन में झाँकुँगी और चली जाऊँगीक्षण के लिए मैं जानती हूँ अपने भाग्य की मर्यादाएँ

8. पुनर्विवाहिता :- पुनर्विवाह के पश्चात भी भुवन के प्रति रेखा के दिल में प्यार के अंकुर हैं। अब भी वह भुवन के प्रति समर्पित है, उसे प्यार करती है। पुनर्विवाह तो मात्र जीवन के साथ एक समझौता है, रेखा का प्रेम दर्द पीड़ा से संकलित है।

9. प्रभावशाली व्यक्तित्व :- रेखा अज्ञेय की अमर नायिका है और उसके जैसा चरित्र उपन्यास भर में कहीं दिखाई नहीं देता। वह असाधारण है। रेखा पुराण प्रधान संस्कृति की अन्याय कारक बेड़ियों काटकर अपनी मर्जी के अनुसार स्वच्छंद जीवन जीने की प्रेरणा देने वाली स्त्री पात्र है।

10. रेखा का रहस्यमयी व्यक्तित्व :- रेखा का रहस्यमयी व्यक्तित्व भुवन को अपनी तरफ आकर्षित करता है व वह उसके रहस्य को उद्घाटित करना चाहता है।

11. वाक्पटुता का गुण व समझदार स्त्री / दार्शनिक विचारधारा :- रेखा, चन्द्रमाधव व भुवन सत्य क्या है, उसे इस बात पर अपने-अपने विचार प्रकट करते हैं, जिससे ज्ञात होता है कि रेखा एक चिंतनशील, बुद्धिमती व अपने तर्क रखने वाली एक स्वतंत्र नारी है। रेखा ने कहा, लेकिन होने को तो झूठ भी है, छल भी है, भ्रम भी हैगया वह सब भी सत्य है ?”

12. कविताओं व किताबों की शौकीन :- भुवन रेखा को अंग्रेजी की कई कविताएँ सुनाता है। यही नहीं रेखा व भुवन के पत्र व्यवहार में भी दोनों अनेकों कविताओं का आदान-प्रदान करते हैं।
भुवन रेखा से –अँटोनी की कविता है – ‘ पेन ऑफ़ लविंग यू इज़ अल्टीमेट मोर दैन आर कैन बेयर‘”

13. गाना – गाने में निपुण :- रेखा बहुत अच्छा गाना गा लेती है। बारे में बताया है जिसके पश्चात चंद्रमाधव भुवन को रेखा के इस गुण के गाने का अनुरोध करता है। भुवन रेखा को गाना ढूँढिए न – मेरा यह आग्रह गुस्ताख़ी तो न होगा?”

14.घूमने-फिरने की शौकीन :- 

रेखा एक स्वतंत्र नारी है व उसे घूमने-फिरने का बहुत शौक है वह कभी चंपाभाग्य के पास आ जाती थी कभी नहीं। वह भुवन के साथ भी नैनीताल, दिल्ली, कश्मीर व पहलगाँव घूमने गई थी।

15.बालहृदय का जागना :-

रेखा जब भुवन के साथ होती है तब वह उसका बालहृदय क्रियाशील व जागृत हो जाता है। वह भुवन के साथ मिट्टी के बालू समुद्र तट पर बनाती है व अपने बचपन को याद करती है तथा “रेखा भुवन से,

रेखा जी, आपको बालू के घर बनाने आते हैं?

16.भुवन के प्रति कृतज्ञ :-

पड़ास में रेखा व भुवन के बीच संबंध स्थापित होता है। जब वे वहाँ से जाने को होते हैं तब रेखा भुवन से कहती है

” भुवन! आई एम फुलफिल्ड ……. कृतज्ञ भाव ही ले कर जाऊँगी – परमात्मा के प्रति और भुवन, तुम्हारे प्रति।”