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1 • सूरदास की भक्ति भावना• सूरदास के सगुण और निर्गुण ईश्वर संबंधी धारणा को स्पष्ट कीजिए।• भ्रमरगीत सार में निर्गुण पर सगुण की विजय किस प्रकार चित्रित है?• भ्रमरगीत मूल उद्देश्य उपालंभ सौष्ठव।

सूरदास की भक्ति भावना और भ्रमरगीत सार (Bhramargit Sar) के महत्वपूर्ण नोट्स। जानिए किस प्रकार उद्धव-गोपी संवाद के माध्यम से निर्गुण ज्ञान पर सगुण भक्ति की विजय का सुंदर चित्रण किया गया है और सूरदास की प्रमुख रचनाओं (सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी) का संक्षिप्त परिचय।
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कबीरदास की काव्यगत विशेषताएँ

कबीरदास की काव्यगत विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन करें। इस लेख में कबीर के भाव पक्ष, कला पक्ष, काव्य-भाषा, प्रतिपाद्य, शैली तथा काव्य की प्रमुख विशेषताओं का परीक्षा की दृष्टि से सरल एवं संपूर्ण वर्णन प्रस्तुत किया गया है।
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अज्ञेय के उपन्यास नदी के द्वीप में रेखा का चरित्र-चित्रण / चारित्रिक विशेषताएँ
अज्ञेय के उपन्यास नदी के द्वीप में रेखा का चरित्र-चित्रण एवं चारित्रिक विशेषताओं का सरल, विस्तृत और परीक्षा-उपयोगी अध्यय बीए, एमए हिंदी एवं UGC NET की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण नोट्स।
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कबीर का दार्शनिक चिंतन

कबीर का दार्शनिक चिंतन भारतीय भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण विषय है। इसमें कबीर के निर्गुणवाद, अद्वैतवाद, सूफी दर्शन, वेदान्त दर्शन, मानवता, प्रेम, समानता तथा आत्मज्ञान संबंधी विचारों का सरल एवं संक्षिप्त अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
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त्यागपत्र उपन्यास में प्रमोद का चरित्र-चित्रण
Tyagpatra Upanyas Mein Pramod ka Charitra Chitran) त्यागपत्र उपन्यास के आधार पर प्रमोद की चारित्रिक विशेषताएं
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कबीर की विचार-चेतना एवं प्रासंगिकता / कबीर की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए / कबीर की प्रासंगिकता पर विचार डालिए

कबीर की प्रासंगिकता : वर्तमान संदर्भ में कबीर की समसामयिकता आज के संदर्भ में 15वीं शताब्दी के हिन्दी काव्य में भक्तिकाल के सबसे प्रमुख कवि कबीरदास माने जाते हैं। वे भक्तिकाल की निर्गुण काव्यधारा (संत काव्यधारा) से संबंधित हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, आडंबर व कुरीतियों का विरोध किया और सरलता से भक्ति का…
